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सुप्रीम कोर्ट: सोशल मीडिया पर ऑक्सिजन और बेड मांगने पर ऐक्शन लेना कोर्ट की अवमानना

कोरोना संक्रमण के बीच सोशल मीडिया के जरिए मदद मांग रहे लोगों पर कार्रवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को सख्त हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई नागरिक सोशल मीडिया पर अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो इसे गलत जानकारी नहीं कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को यूपी सरकार के हालिया ऐक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सोशल मीडिया ऑक्सिजन की गुहार लगाने वाले एक युवक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।


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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली तीन जजों की पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि नागरिक सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं तो इसे गलत जानकारी नहीं कहा जा सकता है।'

'कार्रवाई हुई तो कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी'

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, 'हम नहीं चाहते कि किसी जानकारी पर रोकथाम या नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। अगर ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई के लिए विचार किया गया तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। सभी राज्यों और डीजीपी को एक कड़ा संदेश जाना चाहिए। किसी भी जानकारी पर शिकंजा कसना मूल आचरण के विपरीत है।'

अमेठी में ऑक्सिजन मांगने पर केस दर्ज हुआ था

दरअसल बीते दिनों अमेठी पुलिस ने अपने बीमार नाना की मदद के लिए ट्वीट करने पर शशांक यादव नाम के युवक के खिलाफ केस दर्ज कर दिया था। पुलिस ने बाद में उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया था। अमेठी पुलिस का दावा था कि युवक के नाना को ऑक्सिजन की जरूरत नहीं थी और न ही वे कोरोना पॉजिटिव थे। उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई। पुलिस ने युवक के खिलाफ महामारी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया किया था।

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शशांक यादव नाम के शख्स ने मांगी थी मदद

शशांक ने 26 अप्रैल को ट्विटर के माध्यम से बॉलिवुड ऐक्टर सोनू सूद से अपने बीमार नाना के लिए ऑक्सिजन की गुहार लगाई थी। इसके बाद कई दूसरे पत्रकार भी इस वार्ता से जुड़ते चले गए। इसमें केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद स्मृति इरानी को भी टैग किया। स्मृति इरानी ने कुछ देर बाद ही जवाब दिया कि शशांक को कई बार फोन करने की कोशिश की गई लेकिन वह फोन नहीं उठा रहे हैं। सांसद ने पुलिस और अधिकारियों को भी मदद से निर्देश दिए।

एसपी बोले- सनसनी फैलाने के लिए किया गया ट्वीट

कुछ देर बाद शशांक के नाना का निधन हो गया। इस पूरे घटनाक्रम में अमेठी के एसपी दिनेश सिंह ने कहा, '26 तारीख की रात करीब 8 एक ट्वीट सोशल मीडिया पर आया कि अमेठी में मेरे नाना के लिए ऑक्सिजन की आवश्यकता है। हमने और सीएमओ ने तत्काल शशांक से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसका फोन न उठने की स्थिति में हमने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उसकी लोकेशन ट्रेस कर टीम भेजी। हमें लगा कि हो सकता है कि वह ऐसी कठिनाई में हो कि फोन न उठा पा रहा हो लेकिन कालांतर में जो तथ्य सामने आए कि शशांक के ये रिश्ते के नाना है। शशांक के नाना 88 वर्ष के थे। न उन्हें COVID था, न ऑक्सीजन की चिकित्सीय परामर्श थी। सिर्फ संसेशन पैदा करने के लिए इन्होंने ऐसा ट्वीट किया। जब टीम पहुंची तो ये घर पर सोते हुए मिले।'

'कोरोना से नहीं हार्ट अटैक से हुई थी मौत'

बाद में अमेठी पुलिस ने ट्वीट पर भी जवाब देते हुए लिखा, 'तत्काल संपर्क किया तो जानकारी हुई कि इनके चचेरे भाई के नाना 88 वर्षीय थे, न उन्हें COVID था, न ऑक्सीजन की चिकित्सीय परामर्श थी। रात 8 बजे उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई। इस समय सोशल मीडिया पर इसप्रकार की समाज मे भय पैदा करने वाली पोस्ट डालना निन्दनीय ही नहीं, कानूनी अपराध भी है।'

योगी सरकार के रवैये के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

इस मामले में योगी सरकार के रवैये की काफी आलोचना हुई। उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई। इस जनहित याचिका में कहा गया कि सोशल मीडिया पर कोरोना संकट के समय मदद की अपील कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

स्रोत-नवभारत टाइम्स

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