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राहुल गांधी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक सवाल पर काफ़ी देर रहे ख़ामोश, सोशल मीडिया पर चर्चा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में दिए इंटरव्यू की चर्चा, सोशल मीडिया पर काफ़ी हो रही है. इनमें भी सबसे अधिक चर्चा उनके एक सवाल पर कुछ देर तक चुप रहने पर हो रही है.




कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में मंगलवार को 'इंडिया एट 75' नामक कार्यक्रम में राहुल गांधी पहुंचे थे. जहां पर कॉरपस क्रिस्टी कॉलेज में इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर और भारतीय मूल की शिक्षाविद डॉक्टर श्रुति कपिला ने उनसे सवाल जवाब किए थे.

तक़रीबन एक घंटे की बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने बहुत सारे मुद्दों पर बात की. इस दौरान हिंसा और अहिंसा से जुड़े सवाल पर कांग्रेस नेता कुछ देर तक चुप रहे.

इस चुप्पी के बाद सोशल मीडिया पर कई यूज़र एक ओर राहुल गांधी का मज़ाक उड़ा रहे हैं तो कई यूज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई मौक़ों पर ग़लत ऐतिहासिक संदर्भ देने का हवाला दे रहे हैं.

इंटरव्यू में राहुल गांधी से क्या पूछा
कार्यक्रम में राहुल गांधी से सवाल पूछ रहीं श्रुति कपिला ने कार्यक्रम में तक़रीबन आधे घंटे के बाद उनसे हिंसा और अहिंसा से जुड़ा सवाल पूछा.

उन्होंने पूछा, "मेरी-आपकी पीढ़ी में हिंसा का एक अहम रोल रहा है और आपके मामले में ये व्यक्तिगत भी है. हाल में आपके पिता (राजीव गांधी) की बरसी गुज़री है. मेरा सवाल थोड़ा गांधीवादी सवाल है, वो भी हिंसा और उसके साथ जीने से जुड़ा हुआ. और आपके मामले में ये व्यक्तिगत हो जाता है. क्या आप इसे लेकर सामने आने वाले दबावों से निपटने के व्यक्तिगत तौर-तरीकों पर कुछ बोल सकते हैं और ये भी बताइएगा कि आप भारतीय समाज में हिंसा और अहिंसा के बीच उलझन को किस तरह देखते हैं..."

इसके बाद राहुल गांधी कुछ पल तक चुप रहे और फिर उन्होंने कहा कि 'मुझे लगता है... जो शब्द दिमाग़ में आता है, वो क्षमा करना है. हालांकि, वो सबसे सटीक शब्द नहीं है.'

राहुल गांधी फिर चुप हो गए और कुछ लोग ताली बजाने लगे इसके बाद राहुल गांधी ने लोगों से कहा कि वो अभी कुछ सोच रहे हैं.

इसके बाद श्रुति कपिला ने कहा कि 'मैं आपको परेशानी में नहीं डालना चाहती थी.'

इस पर राहुल ने कहा कि 'आपने मुझे किसी परेशानी में नहीं डाला और ये सवाल मुझसे पहले भी किया जा चुका है.'

राहुल गांधी ने आगे कहा..
"मुझे लगता है कि ज़िंदगी में आपके सामने... ख़ासतौर से अगर आप ऐसी जगह हैं, जहां बड़ी ऊर्जाओं में बदलाव आता रहता है तो आपको चोट लगनी तय है. अगर आप वो करते हैं, जो मैं करता हूं, तो आपको चोट लगेगी ही. ये कोई संभावना नहीं, बल्कि निश्चितता है. क्योंकि ये बड़ी लहरों के बीच समंदर में तैरने जैसा है. आप कभी ना कभी लहरों के नीचे आएंगे ही, ऐसा नहीं है कि ऐसा कभी नहीं होगा. और जब आप लहरों के नीचे जाते हैं तो सीखते हैं कि किस तरह सही प्रतिक्रिया देनी है."

"मेरी ज़िंदगी में अगर सीख देने वाला कोई सबसे बड़ा अनुभव है तो वो मेरे पिता का निधन है. इससे बड़ा अनुभव हो ही नहीं सकता. अब मैं उसे देख सकता हूं और कह सकता हूं कि जिस व्यक्ति या ताक़त ने मेरे पिता को मारा, उसने मुझे भीषण दुख और दर्द दिया. ये बात पूरी तरह ठीक है. एक बेटे के रूप में मैंने अपने पिता को खोया. आप में से कुछ लोगों के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा, और ये काफी दर्दनाक बात है. लेकिन मैं इस तथ्य से भी इनकार नहीं कर सकता कि इसी घटना ने मुझे वो चीज़ें भी सिखाई हैं, जो मैं और किसी परिस्थिति में कभी नहीं सीख सकता था. इसलिए जब तक आप सीखने को तैयार हैं, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग कितने दुष्ट हैं, वो कितने बुरे हैं."

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