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किसानों का गुस्सा बरकरार, भूमि पूजन के बाद उखाड़ फेंकी बीजेपी दफ्तर की नींव

तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है। सरकार को इसके चलते बीते कई महीनों से किसानों का गुस्सा झेलना पड़ रहा है। हाल ही में एक बार फिर ऐसा कुछ देखने को मिला जब हरियाणा के झज्जर में कृषि कानूनों से गुस्साए किसानों ने बीजेपी दफ्तर की नींव उखाड़ दी। ये नींव किसानों के पहुंचने से कुछ देर पहले ही रखी गई थी। नींव उखाड़ने वाले किसानों के इस समूह में महिलाएं भी शामिल थीं।

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भूमि पूजन के ठीक बाद उखाड़ दी नींव

दरअसल, रविवार की सुबह सात बजे बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने रेवाड़ी रोड पर जिला कार्यालय का भूमि पूजन कर शिलान्यास किया था। धनखड़ के जाने के कुछ ही देर बाद संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े लोगों ने आकर ईंटें उखाड़ दी और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।  इधर, इस घटना को लेकर बीजेपी ने कहा है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा।

'किसानों के डर से समय से पहले ही कर दिया भूमि पूजन '

प्रदर्शनकारियों में से एक ने बताया- 'कार्यक्रम सुबह 10 बजे के लिए तय किया गया था, लेकिन भाजपा नेता किसानों के डर से बहुत पहले ही आ गए। ऐसे में हमने भी अपना विरोध दर्ज करने के लिए ये नींव उखाड़ फेंकी। ये किसानों की जीत है।' बता दें कि सरकार से गुस्साए किसान पहले भी ऐसा कर चुके हैं। हाल ही में  हांसी में लाला हुक्मचंद जैन स्मृति पार्क के पुननिर्माण के बाद एक विधायक को उसका उद्घाटन करना था लेकिन किसानों ने एक रात पहले पार्क का उद्धाटन कर दिया। किसानों ने रात में स्वामी इच्छापुरी से पार्क का उद्धाटन करवाया।

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सरकार और किसानों के बीच डेडलॉक जारी

गौरतलब है कि तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले कई महीनों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। सरकार के साथ 11 दौर की वार्ता के बाद भी दोनों पक्ष के बीच कोई फैसला नहीं हो पाया। जिसके बाद से सरकार और किसानों के बीच डेडलॉक जारी है। दोनों ही पक्षों के बीच अंतिम बार वार्ता 22 जनवरी को हुई थी। अब खबर है कि हरियाणा में भाजपा-जजपा विधायकों के घेराव के बाद किसान 26 जून को चंडीगढ़ में राजभवन का घेराव करेगें और राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपकर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करेगें।

स्रोत-LiveHindustan

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