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ध्यानचंद की कही कुछ बाते



1. "मुझे आगे बढ़ाना मेरे देश का कर्तव्य नहीं है। अपने देश को आगे बढ़ाना मेरा कर्तव्य है।" 

2. "अगर आप कोई गोल नहीं कर पाते तो आप मेरी टीम में शामिल होने के लायक नहीं थे।" 

3. "ओलंपिक परिसर में अब एक जादू का शो भी है।" 

4. "आप और आपका विरोधी एक ही चीज चाहते हैं।"

5. " असली प्रतिभा उनके कंधों से ऊपर थी और गर्मी ने हॉकी को शतरंज के खेल के रूप में माना।" 

6. "अच्छा खेल साबित करने का एकमात्र तरीका हारना है।"

7. "गुणों वाले व्यक्ति के लिए कड़ी मेहनत, इच्छा शक्ति और समर्पण की सीमा है, आकाश।" 

8. "मैं स्कूल में बिल्कुल सही था मैंने कभी टैटू नहीं बनवाया था और न ही मैंने कभी कान में छेद कराया था।" 

9. "ध्यानचंद की कहानी ने हॉकी खिलाड़ियों की हर पीढ़ी को प्रेरित किया है।"

Source: Career India



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