जब रतन टाटा 10 साल के थे तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया था। जिसके कारण रतन टाटा को उनकी दादी ने संभाला। आर्किटेक्ट होने की मंशा से उन्होंने अमेरिका के कोर्नेल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। रतन टाटा शर्मीले किस्म के थे ओर वह समाज की झूठी चमक में विश्वास नहीं रखते थे। अपने टाटा नाम को भूल कर खुद के दम पर शिक्षा लेने की ज़िद से रतन टाटा ने अमेरिका में अपनी एजुकेशन खत्म होने तक होटल में कई छोटे-मोटे काम किए। 1959 में उन्हें बैचलर ऑफ आर्किटेक्ट की डिग्री हासिल हुई।
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1960 से उन्होंने टाटा के शॉप फालोअर पर काम करने से अपना करियर स्टार्ट किया। टाटा की परंपरा के अनुसार 1970 तक वह टाटा की अलग-अलग कंपनी में काम करते रहे, जिसके बाद उन्हें मैनेजमेंट में प्रमोट किया गया 1971 में रतन टाटा को टाटा कंपनी की टीवी और रेडियो बनाने वाली और घाटे में चलने वाली नेल्को कंपनी की जिम्मेदारी दे दी गई अगले 3 सालों में रतन टाटा ने इस कंपनी को खड़ा किया नेल्को के मार्केट शेयर को 2% से 20% तक बढ़ाया, लेकिन देश में लागू हुई इमरजेंसी और उसके बाद आई मंदी के कारण उनको कंपनी को बंद करना पड़ा यह रतन टाटा की जिंदगी में आई पहली बड़ी असफलता थी।
1991 में जेआरडी टाटा द्वारा रतन टाटा को टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया। जिसके बाद टाटा ग्रुप और तेजी से बढ़ने लगा। टाटा पहले से ही पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल बनाती थी, पर आम भारतीयों का कार का सपना पूरा करने के लिए 30 दिसंबर 1998 में पूरी तरह से भारत में बनी लग्जरी कार इंडिका लांच की| रतन टाटा का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था ओर इसको पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की लेकिन ऑटो एनालिस्ट ने इस कार को पूरी तरह क्रिटिसाइज किया। जिसका नतीजा टाटा इंडिका की सेल पर पड़ा टाटा इंडिका को मार्केट से अच्छा रिस्पांस नहीं मिला और 1 साल के अंदर ही अंदर टाटा इंडिका फ्लॉप हो गई।
इन्वेस्टर्स द्वारा रतन टाटा को इंडिका की वजह से हुए नुकसान की पूर्ति के लिए अपना कार व्यापार किसी और कंपनी को बेचने का सुझाव दिया। क्योंकि कार लांच करने की योजना टाटा रतन की स्वयं की थी और उससे नुकसान हुआ था तो रतन टाटा ने सुझाव ठीक समझा और साझेदारों के साथ कार कंपनी बेचने का प्रस्ताव फोर्ड कंपनी के पास लेकर गए।
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विलियम फोर्ड ने रतन टाटा से कहा अगर तुम्हें कार बनानी आती नहीं थी तो तुमने इस बिजनेस में इतने पैसे क्यों डालें? यह कंपनी खरीद कर हम तुम पर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हैं। यह बात रतन टाटा को दिल पर लगी वह रातों-रात अपने पार्टनर के साथ डील छोड़कर चले आए पूरी रात वह मीटिंग में हुई बातों को लेकर वह खुद को अपमानित-सा महसूस कर रहे थे। अब उन्हें अपनी सफलता से विलियम फोर्ड को जॉब देना था इसलिए उन्होंने अपना पूरा ध्यान टाटा मोटर्स पर डाल दिया। सालों तक मेहनत की और अपनी पूरी जान लगा कर इंडिका का नया वर्जन इंडिका V2 लांच किया कुछ वर्षों में शुरुआती झटके खाने के बाद रतन टाटा का कार बिजनेस एक अच्छी खासी लाइफ में आगे बढ़ने लगा और बेहद मुनाफे का व्यवसाय साबित हुआ।
वहीं दूसरी तरफ फोर्ड कंपनी अपनी लैंड रोवर ओर जैगवार की वजह से घाटा झेल रही थी। 2008 के आते-आते दिवालिया होने की कगार पर पहुंची, उस समय रतन टाटा ने उनकी जैगुआर ओर लैंड रोवर खरीदने का प्रस्ताव रखा जिसे विलियम फोर्ड ने खुशी-खुशी स्वीकार किया। विलियम फोर्ड बिल्कुल उसी तरह अपने साझेदारों के साथ टाटा समूह के मुख्यालय पहुंचे जैसे कभी रतन टाटा विलियम फोर्ड के मुख्यालय गए थे।
रतन टाटा ने लैंड रोवर ओर जैगुआर ब्रांड खरीद लिया। इस बार भी विलियम फोर्ड ने वही बात दोहराई जो उन्होंने पिछली मीटिंग में रतन टाटा से कहीं लेकिन इस बार बात थोड़ी पॉजिटिव थी। विलियम फोर्ड ने रतन टाटा से कहा आप हमारी कंपनी खरीद कर हम पर बहुत बड़ा एहसान कर रहा है आज जैगुआर और लैंड रोवर टाटा समूह का हिस्सा है ओर बाजार में अच्छी ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहा है। रतन टाटा अगर चाहते तो विलियम फोर्ड को उसी मीटिंग में करारा जवाब दे सकते थे, लेकिन रतन टाटा अपनी सफलता के नशे में चूर नहीं थे।
इंटरनेट की पावर को जानते हुए रतन टाटा ने कई सारी ऑनलाइन पोर्टल्स में निवेश किया जैसे कि पेटीएम, स्नेपडील, शाओमी, ओला कैब्स, केश करो, लेंसकार्ट ओर भी बहोत सी ऑनलाइन कंपनी। आज रतन टाटा की कंपनी अच्छे मुकाम पर पहुंच चुकी है उनकी कड़ी मेहनत के कारण ही।
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