
हिमाचल प्रदेश/कांगड़ा। धर्मशाला के घुमंतू चरवाहे पहाड़ों से अपनी भेड़-बकरियों की समस्याओं से भिड़ने के लिए एकजुट हो गए हैं। चरवाहों ने फैसला लिया है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठाएंगे। इसके लिए सबसे पहले पशुपालन विभाग व प्रशासन को अवगत करवाएंगे कि उन्हें पहाड़ों में क्या दिक्कतें आ रही हैं, पशुओं की बीमारियों से किस तरह से जूझना पड़ रहा है। साथ ही प्रशासनिक तथा विभागीय सहायता तथा सहयोग किस तरह से मिल पाता है।
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पहाड़ों में पशु चिकित्सा की सुविधा न के बराबर होती है। ऐसे में चरवाहों को खुद ही अपनी भेड़-बकरियों का उपचार करना पड़ता है। कई बार तो दवाएं आदि लेने के लिए जब पहाड़ से उतरकर आते हैं तो दवाएं नहीं मिलती, यह भी पता नहीं चलता कि कहाँ जाना है और किससे मिलना है, जो उनकी समस्या का समय पर समाधान कर सके। इन सभी समस्याओं को लेकर चरवाहों ने मंथन किया।
ये डाले गए प्रस्ताव
प्रस्ताव वन अधिकारी 2006 के तहत मिले अधिकारों का पालन हो और वन विभाग, चरवाहों को किसी तरह की रोक टोक न करे। प्रस्ताव यह भी रहा कि घुमंतु चरवाहों की सोसायटी का शीघ्र गठन करना, ताकि सरकार व विभागों से सुविधा मिल सके। प्रस्ताव में पशुओं की बीमारी के लिए सरकार से तत्काल दवाएं आदि अन्य सेवाओं के लिए मांग पत्र भी दिया जाएगा। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन दिया जाएगा, ताकि रास्ते पर चलते वक्त भेड़ें चोरी न हो।
क्षेत्रीय कमेटी गठित
क्षेत्रीय कमेटी का गठन किया गया। यह प्रस्तावों की पालना के लिए काम करेगी। इन प्रस्तावों की पालना के लिए धर्मशाला में क्षेत्रीय कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में पुरुषोत्तम नेहरिया, सुदर्शन, प्रमोद सिंह, पवन पुरोहित तथा राज कुमार भट्ट को शामिल किया गया। इसके अलावा अक्षय, लेखराज, लव, हंसराज, प्रमोद सिंह, सुदर्शन कुमार, मान सिंह, भजन सिंह, विकास पवना कुमारी, सत्या सहित अन्य भेड़पालक मौजूद रहे।
घुमंतू भेड़-बकरी पालकों की बैठक हिमाचल घुमंतू पशुपालक महासंघ की ओर से पुरुषोत्तम नेहरिया की अध्यक्षता में हुई। बैठक में घुमंतू पशुपालकों की समस्याओं पर चर्चा की गई। नैहरिया ने बताया समस्याओं के समाधान के लिए सभी एकजुट हैं और प्रशासन तथा सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे।
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