Banner

लॉर्ड डलहौजी न होता तो भारत में यह सुधार कार्य न होते

 



हमारी आखों में बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सपना देने वाला लॉर्ड डलहौजी

नई दिल्ली : 1848 जनवरी में लॉर्ड हार्डिंग के स्थान पर लॉर्ड डलहौजी को भारत का नया गवर्नर जनरल बनाया गया था. लॉर्ड डलहौजी का पूरा नाम अल ऑफ डलहौजी था. लॉर्ड डलहौजी पूरे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था.

लॉर्ड डलहौजी को विशेष रूप से भारत में राज़ करने और जनता के प्रति उसके ख़राब रवैये के लिए जाना जाता था. लॉर्ड डलहौजी ने ऐसे कई निर्णय लिए जो जनता के लिए हानिकारक थे और उन्हें जबरदस्ती जनता पर थोपा भी गया..

डलहौजी ने अपने शासनकाल में राज्य विस्तार करने के लिए कई नई नीतियों का अपनाया और राज्यों पर जबरन अंग्रेजी हुकूमत कर कब्ज़ा कर लिया. अंग्रेज सरकार को भारत में फ़ैलाने के लिए डलहौजी ने भरसक प्रयास किये. डलहौजी ने भारत की रियासतों को तीन भागों में विभाजित कर दिया।

लॉर्ड डलहौजी के अत्याचार

डलहौजी ने 1849 में युद्ध के द्वारा पंजाब का विरोध कुचल दिया और पंजाब को ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया.

भारतीय राज्यों को हड़पने और अपना गुलाम बनाने के लिए डलहौजी ने गोद प्रथा निषेध की नीति लागू की। जिसमे संतान हीन राजाओं, नरेश जो ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन थे या जिनका अस्तित्व अंग्रेज़ों पर ही निर्भर था वह किसी और पुत्र को गोद लेकर अपने उत्तराधिकारी नहीं बना सकते थे. ऐसे राज्यों को अंग्रेज़ अपने अधीन कर लेते थे.

लॉर्ड डलहौजी के अनुसार भारत में तीन प्रकार की रियासतें थी

वे जो कभी भी किसी उच्च शक्ति के अधीन न रही और न ही कर देती थी.
वे भारतीय रियासतें जो मुगल सम्राट या पेशवा के माध्यम से कम्पनी के अधीन आ गई थी और कर देती थी.
वे रियासतें जिन्हें अंग्रेजों ने पुनर्जीवित कर स्थापित किया था.

लेकिन इन सब के अलावा लॉर्ड डलहौजी ने भारत के लिए कुछ ऐसे काम भी किये जो हम भूल चूके है हर सिक्के के दो पहलू होते है. हमने लॉर्ड डलहौजी के सिर्फ एक ही पहलू को याद रखा है, अब जरुरत है उनके दूसरे पहलू को भी जानने की

लॉर्ड डलहौजी ने जो काम भारत के पक्ष में किये

लॉर्ड डलहौजी ने 1854 ई० में “वुड डिस्पैच” नीति को लागू किया। प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए अच्छी योजना बनाई। कोलकाता, मद्रास और मुंबई जैसी 3 प्रेसिडेंसीयों और प्रमुख नगरों में एंग्लो-वर्नाक्यूलर स्कूल खोले गए और शिक्षा निदेशक नियुक्त किया गया।

यह ऐसी नीति थी जिसने भारत में एक क्रांति के रूप में काम किया अगर आज हम भिन्न-भिन्न यूनिवर्सिटी में पढ़ पा रहे है या सपना देख पा रहे है तो इस सपने को देखने का हक़ हमें लॉर्ड डलहौजी ने ही दिया था. अगर इंसान को उसके बुरे कामों के लिए याद किया जाता है तो उसे उसके अच्छे कामों के लिए भी याद किया जाना चाहिए.

शायद उस वक्त वो पहल न हुई होती तो आज हम यहाँ न होते जहा आज हम IIT और IIM जैसे संस्थान खोल चुके है, हमारे पास यह होते जरूर लेकिन हम वक्त से काफी पीछे होते..?

भारतीय रेलवे के जनक

लॉर्ड डलहौजी ने भारत को जो अमूल्य खजाना दिया उसका नाम है भारतीय रेलवे. लॉर्ड डलहौजी को रेलवे का जनक कहा जाता है.
लॉर्ड डलहौजी ने भारत की प्रथम ट्रेन महाराष्ट्र में 1853 ई० में मुंबई से ठाणे के बीच चलाई थी। रेल चलाने के लिए डलहौजी ने व्यक्तिगत रूप से काफी प्रयास किया था।
इसके साथ ही लॉर्ड डलहौजी को भारत में विद्युत तार की शुरुआत करने का श्रेय भी दिया जाता है। 1852 ई० में विद्युत तार विभाग खोला था।

लॉर्ड डलहौजी ने भारत के लिए कई ऐसे कार्य भी किये है जिसने हमे आज वक्त के साथ चलना सिखाया है या वक्त के साथ बने रहना अन्यथा हम बहुत पीछे होते.


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ