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टीवी कलाकारों ने अपने होमटाउन में दशहरा पर होने वाले उत्सवों के बारे में बताया!

टीवी कलाकारों ने अपने होमटाउन में दशहरा पर होने वाले उत्सवों के बारे में बताया!




दशहरा पर्व को दुर्गा पूजा या विजयादशमी के नाम से मनाया जाता है और इस त्यौहार का भारत के सभी राज्यों में विशेष महत्व है। इस खास मौके पर एण्डटीवी के एक्टर्स ने इसकी अहमियत और अपने-अपने होमटाउन में होने वाले उत्सवों के बारे में बताया। इन कलाकारों में शामिल हैं-  ‘भाबीजी घर पर हैं’ के आसिफ शेख (विभूति), शुभांगी अत्रे (अंगूरी भाबी), सानंद वर्मा (अनोखे लाल सक्सेना); ‘हप्पू की उलटन पलटन’ से योगेश त्रिपाठी (दरोगा हप्पू सिंह), आर्यन प्रजापति (ऋतिक), चारुल मलिक (रुसा) और ‘दूसरी माँ’ से नेहा जोशी (यशोदा) एवं आरजे मोहित (मनोज)। ‘‘दिल्ली का दशहरा’’ के बारे में बात करते हुए, एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं’ में विभूति नारायण मिश्रा की भूमिका के लिये मशहूर आसिफ शेख ने कहा, ‘‘दिल्ली में दशहरा का मुख्य आकर्षण निःसंदेह लाल किला की लव कुश रामलीला में प्रसिद्ध रामलीला की प्रस्तुति देखना है। कुछ साल पहले इस जश्न के दौरान मुझे अपने साथी कलाकार रोहिताश्व गौड़ (मनमोहन तिवारी) के साथ और पिछले साल अपनी ऑनस्क्रीन वाइफ अनीता, जिसकी भूमिका विदिशा श्रीवास्तव निभा रही हैं, के साथ दिल्ली में होने का सौभाग्य मिला था। त्यौहार और जश्न को अपने सामने देखना बेहद अलग अनुभव होता है और इस साल एक बार फिर उसका गवाह बनकर मुझे बहुत खुशी हुई। त्यौहार का जोश और जीवंतता और लोगों का इकट्ठा होना उसे एक यादगार और बेहतरीन अनुभव बना देता है। मेरा इससे कभी मन ही नहीं भरता है, इसलिये मैं हर साल यहां आता रहता हूँ। अगर आपने अब तक लाल किला में रामलीला का भव्य उत्सव नहीं देखा है, तो आप एक बेहद शानदार चीज से चूक रहे हैं और अगर संभव हो, तो आपको उसमें अपने दोस्तों और परिवार के साथ जाने की कोशिश करनी चाहिये। मैं गारंटी दे सकता हूँ कि आपको जीवनभर याद रहने वाला अनुभव मिलेगा! सभी को विजयादशमी की ढेर सारी शुभकामनाएं।’’ उत्तर प्रदेश में दशहरा के त्यौहार का माहौल बताते हुए, एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में दरोगा हप्पू सिंह की भूमिका निभा रहे योगेश त्रिपाठी ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में रावण दहन का दशहरा के उत्सव में बड़ा महत्व होता है। राज्य में विभिन्न जगहों पर भगवान राम द्वारा रावण का पुतला जलाया जाता है और यह कार्य बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। हमारे शहर में प्रमुख जगहों पर राम लीला की भव्य प्रस्तुतियाँ भी होती हैं। भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की भूमिका निभाने वाले कलाकार इस महाकाव्य को जीवंत बनाने के लिये ऑडियो-विजुअल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। और जब ये नायक रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद को प्रतीकात्मक रूप से पराजित करते हैं, तब दर्शक प्रसन्नता से भर जाते हैं।’’ महाराष्ट्र में होने वाले उत्सव के बारे में बात करते हुए, एण्डटीवी के ‘दूसरी माँ‘ में यशोदा की भूमिका निभा रहीं नेहा जोशी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में हमारे दशहरा उत्सव की शुरूआत अपने बड़ों का आशीर्वाद लेकर और आपटा की पत्तियाँ बांटकर होती है। आपटा की पत्तियाँ स्वर्ण का प्रतीक होती हैं और रीति के अनुसार उन्हें दोस्तों, परिवार तथा पड़ोसियों में बांटकर आनंदमय अवसरों के लिये शुभकामनाएं दी जाती हैं। हमारे घर पर मेहमानों का स्वागत करने के लिये मेरी माँ प्रवेशद्वार को तोरण से सजाती हैं। त्यौहार के पकवान, जैसे कि पूरन पोली, श्रीखण्ड पूरी और पूरी भाजी की हमारे परिवार के दशहरा उत्सव में खास जगह है। मैं सभी को खुशियों से भरपूर दशहरा उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूँ।’’ बिहार में होने वाले उत्सव के बारे में, एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में अनोखे लाल सक्सेना की भूमिका निभा रहे सानंद वर्मा ने कहा, ‘‘बिहार में दशहरा धार्मिक उत्साह, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामुदायिकता की मजबूत भावना का संगम है। बीते वर्षों में विकसित हुईं अनोखी परंपराएं और रीति-रिवाज हमारे राज्य में त्यौहार को यादगार और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बना देते हैं। बिहार में दशहरा का उत्सव अक्सर एक महीने से ज्यादा चलता है और तैयारियाँ काफी पहले से शुरू हो जाती हैं। पूरे महीने विभिन्न आयोजन, अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। बिहार की रामलीला प्रस्तुतियों को उनकी अनूठी शैली के लिये जाना जाता है। संवाद अक्सर स्थानीय भोजपुरी बोली में होते हैं, जिससे महाकाव्य की प्रस्तुति स्थानीय लोगों के लिये ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है। भव्य सेट और परिधानों वाली यह रामलीलाएं बहुत विस्तृत और व्यापक हो सकती हैं।’’

मध्यप्रदेश के दशहरा उत्सव के बारे में बताते हुए, एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अंगूरी भाबी, यानि शुभांगी अत्रे ने कहा, ‘‘मैं इंदौर, मध्यप्रदेश की हूँ और दशहरा को लेकर हमेशा से मेरे दिल में एक खास जगह रही है। इस शुभ अवसर पर हमारा शहर एक दुल्हन की तरह सजता है और ‘रावण मोक्ष दिवस’ का उत्सव मनाता है। जब मैं छोटी थी, तब मेरे भाई-बहन और मैं विभिन्न मेलों में जाते थे, जहाँ रावण पर भगवान राम की विजय की कथाओं का मंचन होता था। खान-पान के बिना कोई भी भारतीय त्यौहार पूरा नहीं होता है और मध्यप्रदेश निश्चित रूप से जानता है कि उम्दा पकवान कैसे बनाए जाते हैं! पोहा-जलेबी, खस्ता कचैरी, घेवर और बेसन लड्डू इस खास दिन लगभग हर परिवार की टेबल पर होते हैं।’’ गुजरात में होने वाले भव्य उत्सव के बारे में, एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में ऋतिक की भूमिका निभा रहे आर्यन प्रजापति ने कहा, ‘‘गुजरात में दशहरा को नवरात्र के रूप में मनाया जाता है। दिन की शुरूआत जलेबी फाफड़ा जैसे पकवानों पर टूट पड़ने से होती है, लेकिन मुख्य आकर्षण होता है लुभावना गरबा लोक नृत्य। इस त्यौहार का मूल उद्देश्य है लोगों को एकजुट करना और वे आकर्षक पारंपरिक परिधान पहनकर, हाथों में खूबसूरत डांडिया लिये नृत्य करते हैं। मेरी कामना है कि दशहरा का अलौकिक प्रकाश आपके लिये धन, सफलता और खुशियाँ लेकर आए।’’ एण्डटीवी के ‘दूसरी माँ‘ में मनोज का किरदार अदा कर रहे जयपुर के आरजे मोहित ने कहा, ‘‘जयपुर में त्यौहार का उत्साह उसकी जीवंतता दिखाता है। हमारे शहर में रामलीला की कई प्रस्तुतियाँ होती हैं और मैंने कई बार उन्हें देखने का आनंद लिया है। ये आयोजन बुराई पर अच्छाई की शाश्वत जीत की मार्मिक याद दिलाते हैं, जिसका दशहरा एक प्रतीक है। जयपुर में किसी मेले में घूमे बिना दशहरा का उत्सव पूरा नहीं होता है। मेले वाले मैदानों के हर कोने पर आपको पारंपरिक मनोरंजन, जैसे कि फेरिस व्हील्स और मेरी-गो-राउंड्स और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड तथा मिठाइयाँ मिलती हैं।’’ चंडीगढ़ में दशहरे के त्यौहार वाले माहौल के बारे में, एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में रुसा की भूमिका निभा रहीं चारुल मलिक ने कहा, ‘‘चंडीगढ़ में दशहरा खुशियों और एकता के साथ मनाया जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है, जैसे कि भारत की विभिन्न जगहों के उत्सव होते हैं। राक्षसों के राजा रावण, उसके बेटे मेघनाद और भाई कुम्भकर्ण के पुतलों को जलाना इस समय का सबसे प्रमुख रिवाज होता है, जो कि पाप पर पुण्य की विजय का शक्तिशाली प्रतीक है। लोगों की प्रसन्नता और इस अवसर की याद में कई सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जिनमें नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियाँ होती हैं। इसके अलावा, इस दिन लोग प्रार्थना करने और आशीर्वाद लेने के लिये मंदिरों में जाते हैं।’’

देखिये ‘दूसरी माँ’ रात 8:00 बजे, ‘हप्पू की उलटन पलटन’ रात 10:00 बजे और ‘भाबीजी घर पर हैं’ रात 10:30 बजे, हर सोमवार से शुक्रवार सिर्फ एण्डटीवी पर!

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