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क्यों नहीं गुजरना चाहिए रात के समय श्मशान या कब्रिस्तान के पास से?

 


दुनिया के बहुत से लोग रात के समय श्मशान या कब्रिस्तान के पास से गुजरने को अंधविश्वास मानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यदि यह तथ्य सच है, तो रात में श्मशान या कब्रिस्तान के पास से न गुजरने का क्या कारण है। आपको बता दें कि हिन्दू शास्त्रों के अनुसार रात को नकारात्मक शक्तियां अधिक प्रभावी होती हैं। रात के समय ये शक्तियां अन्य सभी शक्तियों से ज्यादा ताकतवर हो जाती हैं, इसके साथ ही ये सकारात्मक शक्तियों पर हावी हो जाती हैं।

श्मशान और कब्रिस्तान जैसी जगहों पर ये नकारात्मक शक्तियां अधिक वास करती है। जो व्यक्ति इन जगहों के पास से गुजरता है तो यह नकारात्मक ऊर्जाएं उस व्यक्ति के दिमाग पर सीधा असर करती हैं, खासकर तब, जब वह इंसान कमजोर दिल का हो। साथ ही यदि वह इंसान इन ऊर्जाओं को देख ले, तो उस पर दिल का दौरा पड़ने या मानसिक संतुलन खो बैठने का खतरा कई गुना अधिक हो जाता है। रात के समय इन स्थानों पर तांत्रिकों तथा अघोरियों का डेरा भी जमा होता है। इसलिए कहा जाता है कि जैसे ही चंद्रमा आकाश में नजर आने लगे उस समय से लेकर सूर्योदय तक जीवित मनुष्यों को श्मशान घाट या उसके करीब से बिल्कुल भी नहीं गुजरना चाहिए।

विष्णु पुराण में भी बताया गया है कि रात के समय व्यक्ति को श्मशान के पास नहीं रहना चाहिए या गुजरना भी नहीं चाहिए। विष्णुपुराण अट्ठारह पुराणों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा प्राचीन है। यह श्री पराशर ऋषि द्वारा प्रणीत है। इसके प्रतिपाद्य भगवान विष्णु हैं, जो सृष्टि के आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं।

विष्णु पुराण में यह भी बताया गया है कि यदि कोई श्मशान भूमि से आए तो उसको स्नान अवश्य करना चाहिए, क्योंकि जब चिता को जलाया जाता है, तो उस चिता से निकलने वाले छोटे-छोटे जीवाणु मनुष्य के शरीर पर आ जाते हैं। ये जीवाणु कई प्रकार के रोगों का स्रोत होते हैं, जो मनुष्य के लिए हानिकारक होते हैं।

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