आज हम 21 साल के ऐसे अल्ट्रा रनर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिसके पास न तो दौड़ने के लिए पैरों में सही जूते थे, न ही एक धावक की हैसियत से पर्याप्त डाइट, हालत ऐसी कि पैरों में छाले पड़े होने के बावजूद उसने दौड़ना बंद नहीं किया और उनकी इस कड़ी तपस्या का फल उन्हें विश्व की सबसे पुरानी मैराथन दौड़ में से एक में पदक जीतने के साथ मिला. इतना ही नहीं ऐसा करने वाले वह 96 सालों में अपने शहर के एकलौते धावक हैं... जी हां, हम बात कर रहे हैं हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हुई कामरेड मैराथन में पदक हासिल करने वाले इंदौर मध्य प्रदेश के कार्तिक जोशी की, जिनके जूनून के आगे 84 देशों के 20 हजार से अधिक धावक फीके साबित हुए.
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इंदौर के अल्ट्रा मैराथन रनर कार्तिक जोशी ने दक्षिण अफ्रीका की 96 वर्ष पुरानी कॉमरेड मैराथन में सिल्वर मेडल हासिल कर कीर्तिमान रच दिया है. डरबन में हुई 88 किमी की यह मैराथन कार्तिक जोशी ने 7 घंटे 26 मिनट में पूरी की है. कॉमरेड मैराथन इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय ने 7.30 घंटे से कम समय में यह सफलता अपने नाम की हो. इस वर्ष भारत से 405 रनर मैराथन में शामिल हुए थे. जिसमें की पांच इंदौर के धावक थे.
दरअसल यह दौड़ भारतीय समय अनुसार 11 जून को सुबह 9 बजे शुरू हुई. जिसमें भारत से 405 धावकों ने भाग लिया. इनमें कार्तिक जोशी भी शामिल थे जिन्होंने 12 घंटे की दौड़ को 8 घंटे से भी कम समय में पूरा कर लिया। इसी के साथ उन्होंने 88 किमी दौड़ में एक नया नेशनल रिकॉर्ड भी बना दिया और वह लगातार दूसरी बार भारत के सबसे तेज धावक भी बने.
इस प्रतियोगिता के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और पिछले तीन महीने के दौरान, भीषण गर्मी और पहाड़ी इलाकों में लगातार अभ्यास किया और इस दौरान उन्होंने लगभग 3 हजार किलोमीटर सिर्फ अभ्यास के लिए दौड़ लगाई.
बेशक अपनी इस उपलब्धि के जरिए, कार्तिक ने इंदौर शहर के साथ-साथ मध्य प्रदेश और देश का नाम भी गर्व से ऊंचा किया है. कार्तिक अब तक देश के 15 राज्यों में 115 से ज्यादा प्रतियोगिताओं में शामिल हो चुके हैं, इतना ही नहीं वह दो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इसके पहले उन्होंने अपनी सबसे लम्बी 277 किलोमीटर की दौड़ केवल 41 घंटे में पूरी कर ली थी.
इसके अलावा कार्तिक जोशी इंदौर से भोपाल के बीच 200 किमी की दौड़ भी लगा चुके हैं.
कार्तिक देश की करीब एक दर्जन बड़ी मैराथन में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुके हैं. वहीं संघर्ष करते हुए उनके सामने कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आई, जब रेस के लिए बाहर जाने पर कार्तिक के पास होटल में रुकने के पैसे भी नहीं होते थे, उन्होंने स्टेशन पर सोकर और ब्रेड आचार खाकर अपनी भूख मिटाई.
चाहिए चलते चलते आपको कार्तिक की कुछ बेमिसाल उपलब्धियां भी बताते चलते हैं, वह 277 किलोमीटर, 41 घंटे में, हरियाणा 262 किलोमीटर, 39 घंटे में, गुरुग्राम 250 किलोमीटर, बेंगलुरु 220 किलोमीटर, कर्नाटक 203 किलोमीटर दिल्ली 200 किलोमीटर इंदौर से भोपाल 200 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर चुके हैं.

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