Categories, unlike tags, can have a hierarchy. You might have a Jazz category, and under that have children categories for Bebop and Big Band. Totally optiona Categories, unlike tags, can have a hierarchy. You might have a Jazz category, and under that have children categories for Bebop and Big Band. Totally optiona Categories, unlike tags, can have a hierarchy. You might have a Jazz category, and under that have children categories for Bebop and Big Band. Totally optiona

इंदिरा गाँधी की राह पर मोदी और मोदी के आदर्शो पर प्रियंका?

National Politics Trandtropel

ट्रूपल डॉट कॉम विशेष: 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान एक नारा आम था, हर-हर मोदी घर-घर मोदी। मोदी की लोकप्रियता का कद इतना बड़ा हो गया था कि विदेशों तक उनकी वाह वाही थी। जिस दिन लोकसभा चुनाव के रिजल्ट आए थे, उस दिन भारतीय शेयर बाज़ार भी ऊंचाइयों पर था। पूरा भारत विकास का सपना बुन रहा था। आज फिर हमारा देश चुनाव के दरवाज़े पर खड़ा है और अब सवाल उठता है कि क्या विकास का सपना पूरा हुआ? क्या अब भी जनता घर-घर मोदी चाहती है?

वैसे तो नरेंद्र मोदी विवेकानंद से प्रभावित हैं लेकिन राजनीति में उनके दबदबे और कार्यशैली को देखकर कई बार इंदिरा गांधी की झलक सामने आ जाती है। मोदी की कार्यशैली और उनका आक्रामक मिजाज़ बाकी राजनेताओं से कुछ अलग ही रहा है। इसी तरह देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की पहचान देश के साथ विदेशों में भी थी। उनका दबदबा भी कुछ ऐसा था कि शासन प्रशासन में उनके प्रति डर बना हुआ था। हालाँकि आज हम इन सब मुद्दों की वजह से मोदी और इंदिरा गाँधी की तुलना नहीं कर रहे बल्कि इसका मुख्य कारण है डिक्टेटरशिप यानी तानाशाही।

ऐसा कहा जाता है इंदिरा गाँधी सलाह तो लेती थी मगर करती वही थी जो उन्हें ठीक लगता था, देश में इमरजेंसी लगाना बहुत ही कठोर और साहसिक कदम था, ठीक उसी तरह नरेंद्र मोदी ने भी अपने कार्यकाल में कई बड़े, ऐतिहासिक और कड़े निर्णय लिए है। नोटबंदी एक ऐसा मुद्दा था जिस पर सभी उन्हें घेर रहे थे और हमेशा अपनी बात सबके सामने रखने वाले मोदी चुप थे। नरेंद्र मोदी आयरन लेडी इंदिरा गाँधी की तरह ही राष्ट्र के लिए फैसले ले रहे थे। कहीं न कही मोदी के कदम इंदिरा गाँधी की सोच से ही कदमताल करते नज़र आते हैं। देश का इतिहास और भूगोल बदल देने वाली इंदिरा गांधी का व्यक्तित्व वास्तव में एक राष्ट्र की उन्नति और विकास के लक्ष्य को परिलक्षित करता था। लेकिन कहीं न कहीं उन्हें तानाशाह भी कहा जाने लगा था या यूं कहें की आज भी कहा जाता हैं।

नरेंद्र मोदी भी इंदिरा गाँधी की तर्ज़ पर पार्टी की अनसुनी कर अपने नियम खुद बनाते दिखते हैं। भारतीय जनता पार्टी भी दो हिस्सों में बंट गई, पार्टी में दो खेमें बन गए एक मोदी विरोधी और दूसरा मोदी सहयोगी। पिछले पांच सालों में मोदी के तमाम ऐसे फैसले रहे जिसने मोदी नीतियों को तानाशाही का नाम दे दिया है, प्रशासनिक संस्थानों पर मोदी सरकार का सीधा हस्ताक्षेप, आरबीआई हो सुप्रीम कोर्ट के जजों का प्रेस कॉन्फ्रेंस करना हो या बहुचर्चित सीबीआई मामला..इन मुद्दों ने सीधे तौर पर मोदी के तानाशाही वाले रवैये को उजागर करने का काम किया है।

लेकिन एक सवाल यहाँ यह भी पूछे जाना जरुरी हैं कि क्या तानाशाही देश के विकास के लिए ज़रूरी है? क्या भारत भी रशिया और चाइना की तरह ही डिक्टेटरशिप की छाँव में प्रगति करने की स्थिति में है?

आज जब देश में फिर चुनाव होने को हैं तो देश की जनता को भी अपना फैसला करना है और आज भी देश में वही स्थिति है जो इंदिरा गाँधी के समय थी। यह चुनाव भी मोदी वर्सेस मोदी ही है? और आज मोदी के विरोध में कांग्रेस के पास अगर कोई सशक्त नेता दीखता है तो क्या वो वाकई में राहुल गाँधी हैं? या देश मोदी के समकक्ष
पहली बार चुनावी जंग में कदम रख रही प्रियंका गाँधी को मान रहा है। कहीं ना कहीं प्रियंका की नीतियां मोदी से प्रेरित हैं, यह कहना गलत नहीं होगा। 2014 के मोदी के चुनावी अभियान पर नज़र डाले तो नरेंद्र मोदी ने गंगा जमुनी तहजीब से ही अभियान की शुरुआत की थी। आज जब प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की बागडोर अपने हाथो में ली है तो उनका अभियान भी वहीं से शुरू हुआ है। प्रियंका गाँधी के भाषणशैली में वहीं तेवर देखने को मिलता है जो एक समय और आज भी पीएम नरेंद्र मोदी इस्तेमाल करते है, हालांकि प्रियंका तेवर के साथ शालीनता का परिचय भी देती हैं। तो अब अंत में सवाल ये उठता है कि क्या राजनीति में मज़बूत जगह बनाने के इंदिरा गाँधी, नरेंद्र मोदी, या प्रियंका गांधी की नीतियां ही उपयुक्त हैं? इसका जवाब इन आम चुनावों में जरूर देखने को मिल जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

*

Lost Password