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“मी टू” सज़ा या दवा?

Bollywood Business Editor Choice Nation Trandtropel

कंगना रानौत और ने एक बार फिर मी टू कैंपेन की बुझ रही चिंगारी को हवा दे दी है l मी टू कैंपेन की चपेट में बॉलीवुड, राजनीति और व्यापार क्षेत्र की कई बड़ी हस्तियां आ गईl इसके चलते एमजे अकबर को तो अपनी कुर्सी तक गँवानी पड़ीl मी टू कैंपेन अमेरिका में उन लोगों के खिलाफ शुरू किया गया जिन्होंने महिलाओं को यौन हिंसा का शिकार बनायाl सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अनुभव शेयर करना शुरू किया और इस तरह यह कैंपेन और इसकी लपटे भारत तक पहुंच गयी। मगर सवाल यह है कि जब इन महिलाओं के साथ यौन हिंसा की गयी तो यह चुप क्यों थी? अगर बात इनके सम्मान या डर की थी तो इतने वर्षों बाद कैसे बोली?

बहरहाल इसके पहले की हम यह चर्चा करे, जान लेते है कि आखिर यह आंदोलन बना और बढ़ा कैसे? 2006 में मी टू शब्द का प्रयोग दक्षिण अफ्रीका के सोशल वर्कर टराना बुर्क ने किया उन्होंने यौन हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया था, साथ ही बुर्क ने महिलाओं से अपने अनुभव साझा करने को कहा। इसके बाद जब एलिसा मिलानो ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइन्सटीन पर आरोप लगाए, जिसके बाद लगभग 50 अन्य महिलाओं ने भी उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए। इस घटना के बाद इस अभियान को बड़े स्तर पर पहचान मिल गयी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर भी महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए, हालांकि इसका उन्होंने खंडन ही किया। न्यूयार्क टाइम्स को इसका खुलासा करने के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया। इस कैंपेन के चलते 2018 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार भी नहीं दिया गया।

इन सब के बीच कही ना कही मुझे महसूस होता है, इस कैंपेन की अच्छाइयों के साथ इसमें बुराई भी है। यौन शोषण के जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें नामदार लोगों पर ही आरोप लगे है। भारत में भी फ़िल्मी जगत से जुड़ी हस्तियों और नेताओं पर यह आरोप लगे। कई महिलाओं को इस कैंपेन से इन्साफ भी मिला है, तो शायद कई ने इसका फायदा भी उठाया होगा। मेरा मानना है कि जब कुछ महिलाएं अपने संग हुई ज्यादतियों के लिए आवाज़ उठा रही थी, तभी कुछ को यह अवसर की तरह नज़र आ रहा होगा। कुछ महिलाएं अपने डर या सामाजिक कारणों से चुप रहीं, तो वहीँ कुछ को जब तक काम मिलता रहा तब तक वे नहीं बोल सकी।

मेरा एक सवाल आप से भी है क्या आपको लगता है कि इस कैंपेन को कुछ महिलाओं ने अवसर की तरह भुनाया है? हाल ही में कंगना ने जब पहलाज निहलानी पर यह आरोप लगाया तो उन्होंने भी कंगना पर पलटवार करते हुए कहा कि जो आरोप कंगना मुझ पर अब लगा रही हैं, उसी फोटोशूट की वजह से, वो महेश भट्ट की फिल्म कर पाई थी। पहलाज ने तो कंगना को उनसे ना खेलने की चेतावनी तक दे डाली है। हालांकि इस मामले में किसी का पक्ष ले पाना मुमकिन नहीं है। मेरा उद्देश्य इस कैंपेन या महिलाओं पर सवाल उठाने का कतई नहीं मगर मेरा सवाल है क्या इस कैंपेन के ज़रिये कुछ महिलाएं अपना स्वार्थ सिद्ध कर रही है, या फिर पुरुषों को डराने का एक अच्छा हथियार मिल गया है?

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