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‘’एक परफेक्टे दामाद वही होता है जो हमारी बेटियों का अच्छीस तरह ख्या ल रखें, साथ ही उन्हें जितना हो सके बिगाड़ सके…’’

Entertainment Television

शुभा खोटे, सोनी सब के मंगलम् दंगलम्की दादी

 

 सवाल- ‘मंगलम् दंगलम्’ में दादी के अपने किरदार के बारे में कुछ बतायें।

शुभा: मैं एक बेहद फैश्‍नेबल महिला का किरदार निभा रही हूं, जो काफी स्‍टालिश है और हमेशा अलग तरह का हेयरस्‍टाइल करती है। वह भारी-भरकम ज्‍वैलरी पहनती और खूब सारा मेकअप लगाती है। उसके कपड़े काफी भड़कीले हैं। वह काफी हाजिरजवाब किस्‍म की है। उसका व्‍यवहार बूढ़ी महिला जैसा नहीं है। वह तो दिल से काफी जवान है।

 सवाल- इस भूमिका या इस शो को हां कहने की क्‍या वजह रही?

शुभा: यह भूमिका काफी मजेदार है। साथ ही मैंने काफी समय से टीवी शो नहीं किया था। मैं सीरियल करने के लिये इस तरह तैयार नहीं थी, लेकिन मुझे यह भूमिका बहुत पसंद आई, इसलिये मैंने हामी भर दी।

सवाल- आज के समय में मंगलम् दंगलम्बाकी टेलीविजन शोज से किस तरह अलग है?

शुभा: यह शो अलग तरह के विषय पर बना है। हालांकि, यह पारिवारिक विषय है, लेकिन इसका टाइटल आपको बताता है कि यह केवल पारिवारिक चीज़ नहीं है, यह एक दंगल है।

 सवाल- आपके हिसाब से एक परफेक्‍ट दामाद की क्‍या खूबियां होती हैं?

शुभा: एक परफेक्‍ट दामाद वह होता है जो अपने ससुरालवालों की इज्‍जत करे, हमारी बेटी का अच्‍छी तरह ख्‍याल रखे, साथ ही उसे जितना बिगाड़ सके बिगाड़ें और हां उसे प्‍यार करे।

 सवाल- क्‍या आप इस शो में रूमी से रिश्‍तों की बात करते हैं?

शुभा: वह इस शो में हमारी सबसे प्‍यारी पोती है, हमारा एक पोता भी है, जोकि बहुत ही समझदार है। रूमी बहुत ही नेकदिल और मेहनती लड़की है। उसके पिता उसे बहुत प्‍यार करते हैं। हमेशा ही दादी-दादा अपने पोते-पोतियों को प्‍यार करते हैं, लेकिन मैं अपने बेटे को प्‍यार करती हूं और मेरा बेटा अपनी बेटी को। इसलिये, मैं उसे ज्‍यादा दुलार करती हूं।

सवाल- क्‍या इस शो में आप अपने किरदार से खुद को जोड़ पाते हैं?

शुभा: हां, जहां तक मौज-मस्‍ती की बात, मैं वास्‍तविक जीवन में भी ऐसी ही हूं।

सवाल- आप कई दशकों से फिल्‍म और टेलीविजन दोनों का‍ हिस्‍सा रही हैं। आप अपने अब तक के सफर के बारे में कुछ बतायें।

शुभा: मुझे लगभग 63 साल हो गये। मैंने 1955 में सीमाफिल्‍म से शुरुआत की थी। हालांकि, कुछ उतार-चढ़ाव रहे। इस बीच, अपने पति की पोस्टिंग की वजह से मैं काफी सालों तक दूर रही। वरना, मैं ज्‍यादातर समय इंडस्‍ट्री के आस-पास ही रही। केवल पहले हमने जो भूमिकाएं निभायीं, वे काफी अलग थे। वे मुख्‍य नायक और नायिका की तरह ही महत्‍वपूर्ण होते थे। मैंने ज्‍यादातर महमूद और ओमर के साथ काम किया है और हमारा ट्रैक मुख्‍य किरदार के साथ-साथ ही चलता था। हालांकि, उसके बाद फिल्‍ममेकिंग और कहानियों के तरीके बदल गये। इसलिये, वह ट्रैक अब नहीं रहे। मुश्किल से ही कोई रेग्‍युलर कॉमेडियन रहा।

 इसके बाद मुझे कैरेक्‍टर भूमिकाएं मिलने लगीं। हालांकि, ‘एक दूजे के लियेवाला किरदार मुख्‍य रूप से चर्चा में रहा। वह नकारात्‍मक किरदार था, लेकिन उसमें भी कॉमेडी थी। उसके बाद मैंने कई सारे सीरियल्‍स किये, जिनमें से कुछ थे, ‘ज़बान संभालकेऔर दो मराठी सीरियल किये, जोकि काफी नियमित था।

 सवाल- आपको क्‍या लगता है कि जब लाइफ पार्टनर चुनने की बारी आती है तो आज की युवा के लिये पेरेंट्स की राय मायने रखती है?

शुभा: मुझे लगता है कि रखती है। यदि कोई समस्‍या होती है तो मुझे लगता है कि वह आमतौर पर अपने पेरेंट्स से इस बारे में बात करते हैं और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं और एक निष्‍कर्ष पर पहुंचते हैं।

सवाल- सोनी सब के मंगलम् दंगलम्से दर्शकों को क्‍या उम्‍मीद रखनी चाहिये?

शुभा: दर्शक निश्चित रूप से काफी सारी मस्‍ती और हंसी की उम्‍मीद कर सकते हैं।

 सवाल- अपने दर्शकों के लिये कोई मैसेज?

शुभा: देखिये, ‘मंगलम् दंगलम् और उसका मजा लीजिये और हमें बतायें कि यह आपको कितना पसंद आया या आप उसके बारे में क्‍या सोचते हैं।

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