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कर्ज की पिच पर भैंसे और अंडे बेंच, पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में आखिर कितने छक्के जड़ पाएंगे इमरान खान?

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कभी तो खाब सा लगता, कभी लगती हकीकत सी…मिली है जिंदगी मुझको ऐसे, कर्ज में डूबी वसीयत सी.. किसी अज्ञात शायर की कही ये पंक्तियां असल मायने में पाकिस्तान के चार महीने पुराने प्रधानमंत्री इमरान खान के मौजूदा हालत पर एक दम फिट बैठती है. वर्तमान में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में बदहाली का जो आलम है, वो उन्हें पिछली सरकारों से एक विरासत के रूप में ही मिला है. इस बात को कुबूल करते हुए खुद इमरान खान से अपने एक बयान में कहा था कि, ”तहरीक-ए-इंसाफ़ सरकार को 18 अरब डॉलर का घाटा पिछली सरकार से तोहफ़े में मिला है. आने वाले दिनों में पाकिस्तान के पास इतने पैसे नहीं हैं कि क़र्ज़ की क़िस्त अदा की जा सके. हमें क़र्ज़ इसलिए चाहिए कि पिछले क़र्ज़ की क़िस्त अदा कर सकें.”

तो अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे पड़ोसी मुल्क की अर्थव्यवस्था आखिर किस त्रासदी का सामना कर रही है. पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इस साल 42 फ़ीसदी की गिरावट आई है और अब महज 7.8 अरब डॉलर ही बचा है. पाकिस्तान के लिए इतनी रक़म दो महीने के आयात बिल से भी कम है. अक्टूबर महीने में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का पैकेज दिया था. बता दें कि इमरान खान ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए सऊदी अरब को ही चुना था. हालांकि सऊदी अरब की मदद से पाकिस्तान को कर्ज से उबरने में अधिक मदद नहीं मिलने वाली. इस बात को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ से भी मदद लेने की कोशिश कर रहा है. मालूम ही कि 1980 के दशक से अब तक पाकिस्तान 12 बार आईएमएफ़ की शरण में जा चुका है. लेकिन….

भारतीय चवन्नी के बराबर हो चुके पाकिस्तानी रूपये में जान भूंकने के लिए पीएम इमरान खान, पड़ोसी और इंटरनेशनल मित्रों से मदद लेने के अलावा वो हर जुगत करने के लिए तैयार है जिससे वह छह महीने में पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाले अपने बयान को सही साबित कर सकें. इसके लिए अब उन्होंने 100 से अधिक लग्जरी कारों से लेकर भैंसे और अंडे बेंचने का नया फार्मूला इजात किया है. इमरान खान ने अपनी किफायत बरतने की मुहिम के तहत प्रधानमंत्री आवास की 102 लग्जरी कारों में से 70 कारों को सोमवार को नीलाम कर दिया गया. सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पहले चरण में 70 लग्जरी कारों को उनकी बाजारी कीमत पर बेंचा गया है. जिनको बेचकर 200 मिलियन पाकिस्तानी रुपये ($1.6 million ) जमा किए गए हैं. चौधरी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा पाली गई आठ भैंसें भी नीलाम करने जा रहा है.

इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री के विशेष सहायक नईम-उल-हक ने कहा कि सरकार मंत्रिमंडल के उपयोग के लिए रखे गए चार हेलीकॉप्टर भी नीलाम करेगी और सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली बुलेट और बम प्रूफ कारों को भी नीलाम किया जाएगा. लेकिन इतना हाथ पैर मारने के बाद भी क्या इमरान खान हाथ से रेत की तरह फिसलती अर्थव्यवस्था को मुट्ठी में बंद कर पाएंगे! इस सवाल का जवाब खुद इमरान खान भी गूगल कर रहे होगें. क्योंकि पिछले वित्त वर्ष के अंत तक पाकिस्तान का कुल कर्ज बढ़कर करीब 30 हजार अरब रुपये के पार पहुंच गया हैं. तो क्या घूमफिर के इमरान खान उसी चीन की गोदी में जाएंगे जिसकी वन बेल्ट वन रोड परियोजना की वहज से उनके मुल्क के साथ-साथ दुनिया के आठ अन्य देश कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं या फिर तेहरवीं बार मदद के लिए अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष का दरवाजा खटखटाएंगे और एक कर्ज चुकाने के लिए एक और कर्ज का बोझ उठाएंगे! ये तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन एक बात तो तय है कि अपनी सुरक्षा के साथ समझौता कर, अंडे बेंच या भैसों को नीलाम कर, पाकिस्तान के विशाल कर्ज के पहाड़ को ढ़हा पाना नामुमकिन होगा, बेहतर है कि इमरान देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए इससे बेहतर कदम उठाएं और अपने मुल्क की जनता को बहकाना छोड़ एक मजबूत रणनीति के साथ काम करें और इस बात को ध्यान में रखें कि अगर कर्ज में मिलती कहीं मुखौटे की सभ्यता, तो हमने मुखौटे के कर्ज ले लिये होते…चारों तरफ होता मुखौटों का विकास, चेहरों के भीतर चेहरे छिपे हुए होते…

अतुल मलिकराम
ट्रूपल डॉट कॉम को-फाउंडर

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