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छत्तीसगढ़ किसानों के खाते में आने लगे कर्जमाफी के पैसे..लेकिन सबसे जरूरतमंद किसानों को मिलेगा सिर्फ ठेंगा!

Farmer National Politics

हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कॉग्रेस पार्टी को भारी भरकम जीत हासिल हुई. इस जीत की सबसे बड़ी और मुख्य वजह किसानों की कर्जमाफी की घोषणा को बताया गया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने चीख चीखकर इन राज्यों की जनता के सामने उनकी सरकार बनने के 10 दिन के भीतर किसान कर्जमाफी का ऐलान किया था. अपने घोषणा पत्र के वादों को पूरा करते हुए इन तीनों ही राज्यों में सरकार बनते ही कर्जमाफी की कवायद भी शुरू कर दी गई है. इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी गुरुवार को कर्जमाफी की शुरुआत हो गई और किसानों के खाते में पैसे भी आने शुरू हो गये हैं.

कब क्या फैसला लिया गया?

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 17 दिसंबर को शपथग्रहण करने के साथ ही मंत्रिमंडल की बैठक में इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी और 19 दिसंबर को कृषि ऋण माफ़ करने का आदेश भी जारी कर दिया. इसके अलावा सरकार ने धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धान का समर्थन मूल्य 1750 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने का आदेश भी जारी कर दिया है. लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकारी दावों के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ के सभी छोटे बड़े किसानों को कर्जमाफी या बढे हुए समर्धन मूल्य का एक सामान लाभ मिलेगा? क्योंकि आंकड़े और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार के पास शिक्षा और स्वास्थ्य समेत दूसरे विकास कार्यों में लगाने का जो पैसा है, उस रक़म को कृषि ऋण माफ़ी और समर्थन मूल्य के लिये उपयोग किया जाएगा.

क्या कहते हैं अर्थशास्त्री और आंकड़े

आंकड़ों के मुताबिक लगभग पौने तीन करोड़ की आबादी वाले छत्तीसगढ़ में 43 लाख किसान परिवार हैं. राज्य में कर्ज़ लेने वाले किसानों की संख्या महज़ 16 लाख है. इसी तरह राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिये पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या 16 लाख 90 हज़ार है. अर्थशास्त्री जे एल भारद्वाज कहते हैं, “छत्तीसगढ़ में 62 प्रतिशत ग़रीब और सीमांत किसान हैं, जिन्हें इन दोनों चीजों का लाभ नहीं मिलेगा. चाहे ऋण माफ़ी हो या समर्थन मूल्य, इसका लाभ केवल मध्यम और बड़े किसानों को ही होगा.” इसके अलावा अधिकांश सीमांत किसान साहूकारों के कर्ज़ तले दबे हुये हैं. उन्हें भी सरकार के इस फ़ैसले से कोई रहत नहीं मिलने वाली है. भारद्वाज दावे के साथ कहते हैं कि “सरकार का खज़ाना खाली है. सरकार के इस क़दम से विकास के काम प्रभावित होना तय है.”

लेकिन क्या कहना है भूपेश बघेल का

वहीँ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मानना है कि बीजेपी इस बात का तूल बना रही है. जब पीएम मोदी बड़े-बड़े उद्योगपतियों का लाखों करोड़ का कर्ज माफ़ कर सकते हैं तो फिर गरीब किसानों और मजबूरों का कर्ज माफ़ करने में क्या दिक्कत है. बहरहाल ये बात तो कही का कही सच है कि जब सरकार का खजाना खाली है तो कर्जमाफी का पैसा कहाँ से आएगा. और अगर कर्जमाफी होगी तो अन्य विकासकार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ना लाजमी है. लिहाजा सरकारों को कृषि समस्या के कर्जमाफी जैसे चुटपुंजिये उपायों के बजाए इसके लॉन्ग लास्टिंग समाधानों के बारे में सोचना चाहिए.

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