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सत्ता के भूखें बाप-बेटों ने थामा बीजेपी का दामन

Madhya Pradesh Politics State Politics
  • सत्ता के भूखे कांग्रेसियों ने चुना बगावत का रास्ता
  • सत्ता के भूखे कांग्रेसियों ने छेड़ा बगावती सुर, थामा भाजपा का दामन

इंदौर: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है. महाकाल की नगरी उज्जैन से कांग्रेस सांसद रहे प्रेमचंद्र गुड्डू ने शुक्रवार शाम भाजपा का दामन थाम लिया है. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली में उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलवाई. इस मौके पर गुड्डू ने कहा कि वह लम्बे समय से कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे थे. गुड्डू के साथ उनके पुत्र अजित कुमार भी बीजेपी में शामिल हो गए. अजीत युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे और कांग्रेस ने कुछ समय पहले ही उन्हें इस पद से नवाजा था. गौरतलब है कि गुड्डू विधायक रहने के साथ दो बार कांग्रेस की तरफ से सांसद भी रह चुके हैं.

बता दें कि मध्यप्रदेश चुनावों के मद्देनजर भाजपा ने आज उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की हैं और आज ही कांग्रेस को तगड़ा झटका भी दिया हैं. दरअसल इस सियासी उलटफेर की बड़ी वजह गुड्डू की जारजगी बताई जा रही हैं. गुड्डू को कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का काफी करीबी माना जाता हैं वहीं कांग्रेस में लगातार दिग्विजय की उपेक्षा हो रही है, जिससे गुड्डू ख़ासा नाराज है. बताया जा रहा है कि इस विषय पर पिछले दिनों उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से भी मुलाक़ात की थी. इसके अलावा पिछले लम्बे समय से कमलनाथ और गुड्डू के बीच भी तनातनी की खबरे आ रही थी. ख़बरों के अनुसार उज्जैन से सांसद रहे गुड्डू को उज्जैन में ही नियुक्तियों के दौरान नजरअंदाज किया गया और यहां के लगभग सभी पद कमलनाथ के समर्थकों में बांट दिए गए. सूत्रों के मुताबिक इस बात से नाखुश गुड्डू ने कमलनाथ को दो तुक कहा था कि जब जिला और ब्लॉक आधार पर उनके हिसाब से नियुक्ति नहीं हो रही तो फिर चुनावों में क्या होगा.

हालांकि इन सब परिघटनाओं से पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने एक टीवी चैनल को दिए बयान में कहा था कि वह 4 बजे एक बड़ा धमाका करने जा रहे है, और उनके इस बयान से कांग्रेस को तगड़ा झटका लगने वाला है. तो कुलमिला कर हम यह कह सकते है कि अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी तोड़ मरोड़ की राजनीति तो बेशक अच्छी करती है लेकिन चुनावों से ठीक पहले गुड्डू द्वारा दल बदली का खेल साफ़ तौर पर राजनीतिक फायदे के लिए उठाया गया कदम मालूम पड़ता है. लगभग 30 सालों से कांग्रेस के जरिये जनता की सेवा कर रहे गुड्डू को अचानक पार्टी ख़राब लगने लग गई क्योंकि पार्टी ने उनके और उनके मित्र दिग्गी राजा को चुनावी गतिविधियों में भाव नहीं दिया. शायद इस बात से तिलमिलाए गुड्डू और उनके पुत्र ने एक रणनीति के तहत भाजपा को अपना नया साथी बना लिया. और शायद सत्ता की भूख ने इन दोनों बाप बेटों को कांग्रेस से बगावत करने के लिए प्रेरित किया.

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