भंसाली की फिल्मों पर “बवाल का कमाल”

Bollywood Entertainment

फ़िल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ‘पद्मावत’ को लेकर देश के कई हिस्सों में हिंसक विरोध हो रहा है.उत्तर भारत में कई शहरों पर धारा 144 लगाई गई है.लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब भंसाली की किसी फ़िल्म को लेकर विवाद पैदा हुआ हो.अगर उनकी पिछली कई फ़िल्मों पर नज़र डालें तो लगभग हर फ़िल्म ने विवाद का सामना किया है.

आइए जानते हैं कि भंसाली की वो कौन कौन सी फ़िल्में हैं जिन पर विवाद हुआ और इसकी वजह क्या थी?

द्मावत

भंसाली की आगामी फ़िल्म ‘पद्मावत’ को बनाते बनाते ही विरोध का सामना करना पड़ा था खबरे तो यह भी थी की उन्हें चाटा भी जड़ दिया गया था .वही ‘पद्मावत’  का ट्रेलर जारी होने के बाद से ही इस फ़िल्म पर विवाद शुरू हो गया था.

फ़िल्म की रिलीज़ से ठीक पहले अहमदाबाद और कानपुर में सिनेमाघरों के बाहर हिंसक विरोध की घटनाएं सामने आई हैं.

भंसाली पर आरोप है कि उन्होंने जान-बूझकर ऐसी फ़िल्म बनाई जिससे एक समुदाय विशेष की भावनाएं भड़कीं.और साथ ही साथ इतिहास से छेड़छाड़ भी की गयी है हालांकि, विवाद भड़कने के बाद फ़िल्म का नाम बदलकर ‘पद्मावती’ से ‘पद्मावत’ कर दिया गया है.

इसके साथ ही फ़िल्म के कुछ सीन्स भी काटे गए हैं. लेकिन इसके बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.वहीँ यह फिल्म कल से सिनेमा घरो में लगन्मे वाली है.

बाजीराव मस्तानी

17वीं शताब्दी के शासक पेशवा बाजीराव द्वतीय पर बनी फ़िल्म को लेकर भी भंसाली को विवादों का सामना करना पड़ा था.

इस फ़िल्म में विवाद का कारण यह था की इसमें भंसाली ने फ़िल्म के दो किरदारों काशीबाई और मस्तानी के बीच एक गाना “पिंगा” फ़िल्माया था.ये कहा गया था कि पेशवाई में शाही महिलाएं इस तरह डांस नहीं करती थीं. इंदौर राजघराने ने भी इस फ़िल्म पर एतराज जताया था.

यही नहीं, फ़िल्म में काशीबाई और मस्तानी यानी प्रियंका और दीपिका पादुकोण कई बार एक ही फ्रेम में नज़र आती हैं.इस पर पेशवा बाजीराव के वंशजों का कहना है कि बाजीराव और मस्तानी की मुलाकात सिर्फ़ एक बार हुई थी.

लेकिन इतने विवादों के बाद भी जब ये फ़िल्म रिलीज़ हुई तो फ़िल्म ने भारी कमाई की थी.

गोलियों की रासलीला

बाजीराव मस्तानी से पहले भंसाली ने दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के साथ ‘रामलीला’ फ़िल्म बनाई थी.इसका नाम आने के बाद से ही फ़िल्म के नाम को लेकर ऐसा विवाद पैदा हुआ जिससे भंसाली को फ़िल्म का नाम बदलकर ‘गोलियों की रासलीला’ रखना पड़ा.

इसके साथ ही इस फ़िल्म में मुख्य किरदारों के सरनेम ‘जडेजा’ को राजपूत समुदाय ने विरोध किया था जिसके बाद ‘सनेडा’ और ‘राजाडी’ सरनेम इस्तेमाल किए गए.

फ़िल्म में इस्तेमाल की गई रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘मोर बनी थनघट करे’ के गुजराती अनुवाद को लेकर भी विवाद पैदा हुआ था.इस कविता का अनुवाद गुजराती कवि जवरहंद मघानी ने किया था लेकिन उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था.

गुज़ारिश पर सलमान से जुड़ा विवाद

रितिक रोशन और ऐश्वर्या राय की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फ़िल्म को लेकर सलमान खान ने आपत्तिजनक बयान दिया था.इसके अलावा फ़िल्म के निर्माताओं पर कहानी चोरी करने का आरोप भी लगाया गया था.खबरों की माने तो कहा जाता है की उस समय सलमान ने कहा था की “अरे , कोई कुत्ता भी देखने नहीं गया “.

देवदास के डोला रे डोला पर विवाद

भंसाली के फ़िल्मी करियर की सबसे ख़ास फ़िल्मों में से एक फ़िल्म देवदास के एक गाने ‘डोला रे डोला रे…’ को लेकर विवाद पैदा हुआ था.क्योंकि ‘देवदास’ पर असली उपन्यास में पारो और चंद्रमुखी की मुलाकात नहीं है.लेकिन फ़िल्म में माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय ने एक साथ ‘डोला रे डोला…’ गाने पर डांस किया है.

भंसाली पर जानबूझकर ऐसे विषय चुनने का आरोप लगाया जाता है जिसकी वजह से विवाद पैदा हो.लेकिन इन विवादों के बाद भी उनकी गिनती दुनिया के उन निर्देशकों में की जाती है जो अपनी ख़ास सिनेमेटोग्राफ़ी के लिए चर्चित हैं.उनकी फ़िल्मों में किसी एक्टर या एक्ट्रेस की जगह उनका कैमरावर्क फ़िल्म का असली हीरो होता है जिसके दम पर उनकी फ़िल्म करोड़ों का कारोबार करती है.भंसाली का कैमरा भारत के राजघरानों के उस वैभवशाली इतिहास को 70 एमएम के पर्दे पर ज़िंदा करता है जिसका ज़िक्र किताबों में हुआ करता है.

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