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जानिए इंदौर से “स्वच्छ इंदौर” बनने की पूरी कहानी

Madhya Pradesh National Politics

दो साल पहले, मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर और सबसे अधिक आबादी वाले शहर “इंदौर” जिसे प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी भी कहा जाता है उस इंदौर शहर ने साफ-सफाई और स्वच्छता की निराशाजनक तस्वीर को चित्रित किया था, जो 2014 में स्वच्छ सर्वेक्षण में 149 वें स्थान पर पहुंचा था । रैंकिंग प्रशासन को शर्मिंदा करने के लिए पर्याप्त थी और वहाँ से ही एक महान बदलाव की कहानी का आरम्भ हुआ ।

इंदौर को बेहतर सुधार के बावजुद वर्ष 2016 के स्वच्छ सर्वेक्षण श्रेणी  में कई गुना वृद्धि कर 25वें स्थान से संतुष्टि करना पड़ा था  लेकिन फिर भी शहर के सफाई योद्धाओं ,निगम कर्मचारी एवं महापौर श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के प्रयासों में कोई कमी नहीं आई और इस बेहतर प्रदर्शन से यह दृढ़निश्चय किया गया की स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 के लिए ओर अधिक परिश्रम करेंगे । निश्चय अनुसार नगर निगम के सभी कर्मचारी,कमिश्नर एवं महापौर इंदौर को स्वच्छ शहर की श्रेणी में उच्च पायदान पर लेजाने के लिए प्रगतिशील दिखाई दिए एवं निरंतर शहर की सफाई को एक अभियान के रूप में जारी रखा ।

वही पिछले वर्ष 4 मई 2017 को भारत सरकर एवं भारत की गुणवत्ता परिषद द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 के परिणाम जारी किये गए , जिसमे इंदौर शहर द्वारा 2000 अंक में से सर्वाधिक 1807.72 अंक अंकित कर प्रथम स्थान अर्जित किया गया । साथ ही साथ प्रदेश के ही भोपाल ने दूसरा और विशाखापट्नम  ने तीसरा स्थान अर्जित किया । अतः “इंदौर” ने देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में अपनी पहचान बनाई ।

स्वच्छ भारत मिशन की प्रगति की निगरानी के लिए 434 शहरों और कस्बों में 17,500 स्थानों के मौके पर आकलन के लिए 421 मूल्यांकनकर्ताओं की मदद से सर्वेक्षण किया गया था । वास्तविक समय में सर्वेक्षण प्रक्रिया की नियमित निगरानी के लिए 55 लोग शामिल थे । महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ , निगम कमिश्नर मनीष सिंह ,निगम कर्मचारी एवं शहरवासियों के भरसक प्रयासों के फलस्वरूप ही इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव हासिल हुआ ।

इंदौर शहर की महापौर मालिनी गौड़ ने (आईएमसी) के कर्मचारियों और सभी सार्वजनिक प्रतिनिधियों,शहर के निवासियों द्वारा देश के साफ शहरों में नंबर एक स्थान प्राप्त करने के लिए सभी इंदौर वासियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की थी  ।  साथ ही साथ  उन्होंने कहा था कि स्थानीय नागरिकों के समर्थन के बिना यह संभव नहीं था , यह गौरव हर नागरिक का है  ।

“यह स्वच्छता का जश्न है, जहां हमें स्वच्छता की आदत पैदा करने का संकल्प लेना चाहिए”

महापौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू द्वारा स्वच्छता को एक सार्वजनिक अभियान के रूप में बनाने के लिए कृतज्ञता व्यक्त की थी और लोगों को इसमें योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया था ।

इन्दौरी इस बात पर गौरवान्वित तो है की वह देश के सबसे स्वच्छ शहर से आते है पर क्या हम जानते है की 2 वर्षो में ऐसा क्या हुआ की इंदौर 149 वें  स्थान से शीर्ष  तक पहुंच गया ? कैसे एक इंदौर “स्वच्छ इंदौर ” बन गया ? किसके प्रयासों का नतीजा है यह ? कौन है इसके पीछे ? क्या आप जानते है कि इंदौर को स्वच्छ इंदौर बनाने में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था ?  कैसे एक इंदौर, इंदौर नं 1 बना ?

“स्वच्छ इंदौर” बनने तक की राह बहुत ही कठिन तो थी ही पर साथ ही साथ कटीले रास्तों से हो कर भी जाती थी क्युकी अगर एक तरफ सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर था तो वही दूसरी और खुले में सोच भी एक समस्या थी । परन्तु वही 2015 में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की महापौर प्रत्याशी श्रीमती मालिनी गौड़ ने अपने पुरे चुनावी प्रचार में  शहर की स्वछता को ही एक प्रथम मुद्दा बनाया था जिसके कारण ही उन्हें 2.5 लाख से भी अधिक वोटों से अपने प्रतिद्वंदी को हराकर विजय की प्राप्ति हुई थी । महापौर बनने के साथ ही श्रीमती मालिनी गौड़ के  लिए मुख्य चुनौती यह थी की उनके “शहर की स्वछता” के वायदे को पूरा कैसे किया जाए ।

खुले में शौच पर रोक

जब 2014 में शहर को निराशाजनक रैंकिंग दि गयी थी , तो अधिकारियों ने शहर की कमियों को दूर करने कि योजना बनाना और नए नए सुचारु कदम उठाना शुरू कर दिया था ।  शुरुआत के लिए, खुले में शौच एक बहुत बड़ी समस्या थी । शहर को सबसे पहले खुले में शौच मुक्त करने से हुई , इसके लिए इंदौरनगर निगम द्वारा “रोको और टोको अभियान” को लांच किया गया जिसका मुख्य मकसद लोगो को खुले में शौच करने से रोकने के साथ साथ उन्हें खुले में शौच करने के नुकसान के बारे में बताना भी था ।

एक साल पहले शहर में 15,000 से ज्यादा घरों में शौचालय अनुपस्थित थे। एक वर्ष की अवधि के भीतर, नगर निगम ने शहर में व्यापक स्वच्छता कवरेज प्रदान करने के लिए 12,549 व्यक्तिगत शौचालय, 200 मूत्रघर और 190 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया। नगर निगम के प्रयास से इंदौर की स्वच्छता की स्थिति में सुधार हुआ और इसे प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा जनवरी 2017 में “खुले में शौच मुक्त शहर” घोषित किया गया यह महापौर की नीतियों एवं नगर निगम कर्मचारियों के कठिनतम प्रयासों की पहली जीत थी और इससे यह साबित हो गया था की जो वायदे महापौर के चुनाव के द्वारा किये गए थे उन्हीं वायदों को पूरा करने के लिए श्रीमती मालिनी गौड़ आतुर दिखाई दे रही थी और इन सब कार्यो में जन समर्थन भी मिलते जा रहा था ।

सुचारु कचरा संरक्षण प्रणाली

श्रीमती मालिनी गौड़ एवं निगम कमिश्नर मनीष सिंह कि सोच केवल शहर को खुले में शौच मुक्त करने या शौचालय निर्माण तक ही सिमित नहीं थी अब उनका अगला लक्ष्य शहर की सबसे बड़ी समस्या ‘गन्दगी’ से मुक्त था और इसी के चलते  उनका पूरा ध्यान एक स्थिर और अच्छी दीर्घ कालीन कचरा संग्रह प्रणाली को बनाने में था । इसी के अंतर्गत सबसे पहले शहर के मुख्य मार्गो से 1,400  कूड़ेदान हटा दिए गए हैं । जी हाँ आपने सही पढ़ा , परन्तु अब आप यह सोचेंगे यह कैसा फैसला है कि शहर की कचरा पेटियों को हटाके शहर को स्वच्छ बनाया जाएगा ? इनको हटाने का कारण क्या है ? कचरा पेटी हटाने का कारण यह था की अगर नागरिक नगर पालिका निगम द्वारा चलाये जा रहे “डोर टू डोर” कचरा संरक्षण सेवा के तहत कचरा देना किसी कारण वश रह जाता था तो वह उस कचरे को प्लास्टिक की थैली में डालकर उन कूड़े दानो में दाल आते थे जिसमें कभी-कभी कूड़ेदान भरा होने के कारण कूड़ा कूड़ेदान के अंदर की बजाये बहार भी आ जाता था जिसके कारण वश गन्दगी ज्यादा होती थी । इसीलिए उन कूड़ेदानो को हटाकर नगरपालिका निगम द्वारा मोबाइल कचरा संग्रह वैन की शुरुआत की गई । शहर हर दिन 50,000 किलो नगरपालिका कचरा उत्पन्न करता है, जिसमें से 13,000 किलो प्लास्टिक कचरा है इंदौर की अपशिष्ट समस्या से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम (आईएमसी) ने एक प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर की स्थापना की,इसी के फलस्वरूप चार महीने के भीतर ही शहर में प्लास्टिक प्रदूषण का स्तर प्रति घन मीटर 140 माइक्रोग्राम से घटकर 80 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर आया।

कठिनतम प्रयासों से बना एक अभियान

“इंदौर को स्वच्छ बनाना है अब हमने यह ठाना है…..स्वच्छ इंदौर..” की ध्वनि से लोगो को पहले ही पता चल जाता था की कचरा वैन कचरा संरक्षण करने के लिए आ रही है तो वह स्वयं अपने घरो से निकल कर गाड़ी में कचरा  फेकना आरंभ कर दिया और और फिर इसी प्रयास को हकीकत बनाने स्वरुप स्वयं महापौर मालिनी गौड़ ,निगम कमिश्नर मनीष सिंह एवं कई अन्य उच्च अधिकारीयों के साथ साथ वार्ड पार्षदों एवं नगर पालिका निगम के हर कर्मचारी ने कड़ी मेहनत कर जन सामान्य को इसके बारे में जानकारी दी । महापौर मालिनी गौड़ द्वारा हर वार्ड में जाकर कई सभाये आयोजित की गयी । महापौर द्वारा की गए इन कठिनतम पप्रयासों को शहरवासियों का साथ मिला और इन्ही भरसक प्रयासो से ही देश के सबसे स्वच्छ इंदौर बनने की नीव रखी गयी ।

नागरिक निकाय ने इंदौर के सबसे बड़े सब्जी बाजारों में कुछ खाद गड्ढों का भी निर्माण किया, जिसके परिणामस्वरूप वनस्पति कचरे को कुशल रूप से खाद में बदल दिया गया। इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए शहर में पहले कुछ वार्डों में सड़क किनारे नीले और हरे रंग के लिटिरबिन्स लगाए गए ,जिसमे नीले रंग वाले के ऊपर  सूखा कचरा एवं हरे रंग वाले के ऊपर गिला कचरा लिखा था और इसकी जानकारी देने हेतु “स्वच्छ इंदौर ” की ध्वनि के साथ शहर भर में भ्रमण कर रही मोबाईल कचरा वैन, रेडियो,टीवी,अख़बार,ऑनलाइन वीडियो,यूट्यूब सभी माध्यमों से जन जन तक पहुंचने और इस अभियान से जुड़ने की अपील की गयी । इसके साथ ही साथ नगर  पालिका निगम कर्मचारियों द्वारा हर वार्ड गली मोहल्ला में जन सभायें आयोजित की गयी एवं गीले-सूखे कचरे के संरक्षण को सकती से लागू कर वार्ड ,दुकान एवं घर घर जाकर नागरिको से अपिल की गई की वह सूखा कचरा “गीले रंग के कूड़ेदान ” एवं  गिला कचरा “हरे रंग के कूड़ेदान ” में डाले और अपने घर, दुकान सभी के बाहर इन्ही दो रंग के डस्टबिन को रखे ,एवं दुकानदारों से भी अपिल की गई की वह अपनी दूकान के बहार कूड़ादान अवश्य रखे सूखा और गीला कचरे के अलगाव के लिए रंग कोडित कूड़ेदान की बड़ी संख्या इंदौर के आसपास लोगों को बायोडिग्रेडेबल और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को पृथक करने के लिए अलग से स्थापित किया गया है।

अद्वितीय जागरूकता तरीक अपनाये गए

आईएमसी ने इस मुद्दे से निपटने में लोगों को शामिल करने और स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए अनूठे तरीकों को अपनाने के महत्व को समझा और इसके फलस्वररूप  स्वच्छ भारत  अंतर्गत स्वच्छ इंदौर में स्कीट और नाटकों द्वारा भी लोगों को जागरूप किया गया । ज्यादातर शहरों में दो बार सफाई होती है वही इंदौर के मुख्य सड़कें दो बार के बजाय के एक दिन में तीन बार साफ़ की जाती  हैं । शहर की लगभग 150000 वर्ग मीटर दीवारों पर पेंटिंग और भित्ति चित्रों से, जागरूकता की पहल कि गयी एवं स्वच्छ इंदौर के अभियान को इन प्रयासों के माध्यम से ओर गति प्रदान करने के लगातार प्रयास किये गए ।

अभियान के दौरान सबसे कठोर कदम

वार्ड प्रमुखों को करीब 60 जीप भी दि गई थी , जो अपने वार्डों में जाकर पुरे अभियान की निगरानी रखते थे और कोई  भी समस्या हो या किसी भी प्रकार से नियम का उल्लंघन न हो उसकी समीक्षा करने के साथ उलंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाता था ।  सूत्रों का कहना है कि छ: यूनियनों के अध्यक्षों से गठबंधन और आत्मविश्वास में लेने के बाद करीब 600 सफाई कर्मचारी , जो काम करने से इनकार कर रहे थे , उन्हें निकाल दिया गया । इसके बजाय एक हजार तैयार श्रमिकों को काम पर रखा गया है वही वर्तमान स्टाफ में 6,500-7,000 व्यक्ति है । जुर्माना लगाने  के अलावा, सभी प्रकार की रेलियों  के लिए शुल्क लगाए जाने का प्रावधान बनाया गया । यहां तक ​​कि एक राजनीतिक रैली करने के लिए भी शुल्क का भुगतान करने का प्रावधान बनाया गया।

इसके साथ साथ नगर पालिका निगम द्वारा शहर भर में कई अन्य अवैध ढांचे तोड़े गए । उनमें से प्रमुख कनाड़िया से टेलीफोन नगर तक 5 किमी लंबी, पुराने शहर में राज मोहल्ला से बड़ा गणपति , महू नाका से टोरी कॉर्नर (जहां  से महापौर स्वयं आती  हैं) और मालवा मिल के जितने अवेध निर्माण एवं अतिक्रमण थे उन सभी पर करवाई की गयी । अवैध पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किये जाने वाले पचास बड़े गोदामों को भी ध्वस्त कर दिया गया, जबकि  वही 2000 ईडब्ल्यूएस के घर कमजोर वर्गों के लिए आवंटित किए गए थे। शेखर नगर की झोपड़ी पुनर्विकास करके प्रशासन ने शहर के केंद्र में 60 एकड़ जमीन खाली की थी ।

देश का स्वच्छ शहर बनना एक जिम्मेदारी

इंदौर नगर निगम जो 85 वार्डों और 27 लाख से ज्यादा लोगों की आबादी को नियंत्रित करता है वही देश की लोकसभा स्पीकर श्रीमती सुमित्रा महाजन का संसदीय छेत्र  भी है उसी के साथ जब ४ मई २०१७ को सर्वेक्षण के परिणाम आये तब उन्होंने कहा की “मैं बहुत ख़ुश हूँ। मैं इंदौर के लोगों को श्रेय देती हूँ जो हमेशा किसी भी अच्छी पहल के लिए आगे आते हैं। यह उनके पूरे मन से भाग लेने के कारण ही है जो की हम इस जगह तक पहुंच पाए हैं।

प्रदेश मुख्यमंत्री,श्रीमान शिवराज सिंह चौहान के साथ अनन्य देशवासियों और मुख्यमंत्रियों द्वारा भी प्रशासन एवं शहर वासियों को बधाई दी गयी थी ।

 “इंदौर रहेगा नं.1”लक्ष्य- 2018

देश के सबसे स्वच्छ शहर बनने के बाद महापौर श्रीमती लक्ष्मण सिंह गौड़  ने इसे एक जिम्मेदारी के रूप में लिया है । और फिर से शहर को नंबर 1 बनाने के लिए भरसक प्रयास करना आरम्भ कर दिया. कई नए उपायों से साथ महापौर श्रीमती लक्ष्मण सिंह गौड़  ने कई नई योजना और अभियान चलाकर अपना गौरव बरक़रार रखने के लिए प्रयास शुरू कर दिये है जेसे समस्या सुनने के लिए “इंदौर 311 एप”  को लांच किया गया जिसके माध्यम से शहर में अगर कही भी गन्दगी है या सफाई सुचारू रूप से नहीं हुई है तो आप इस एप के माध्यम से निगम को सूचित कर सकते है ,साथ ही साथ उन्होंने फ़ोन नंबर भी दिया है और वह समस्या को रात के दो बजे भी सुनती है ताकि कई भी किसी भी प्रकार से किसी भी शहर वासियों की समस्या सुनी जा सके ।

साथ ही  शहर में विभिन्न जगहों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से, पोस्टर एवं विडियो के मध्याम से शहर में स्वछता बनाये रखने एवं एप के माध्यम से जानकारी दी जाती है आम जन के साथ महापौर श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ द्वारा कईसम्मेलनों में ,कॉर्पोरेट मीटिंग्स में,युवा के साथ संपर्क में ,महिला सम्मेलनों में,विद्यालय के  नन्हें नन्हें छात्रों द्वारा स्वछता पर पेंटिंग वें निबंध लेखन भी आयोजित किया गया था जिसमे भी श्रीमती गौड़ ने पहुचकर सभी अध्यापको ,स्कूली बच्चो के साथ स्वच्छता की शपथ ली थी । श्रीमती गौड़ जिस भी कार्यक्रम में जाती है वहां स्वयं एवं  सभी उपस्थि शहर वासियों को स्वच्छता की शपथ दिलाती है क्युकी शहर की स्वच्छता उनके लिए सर्वोप्रथम है ।

अपनी महापौर द्वारा किये गए इतने कठिनतं प्रयासों को देख शहरवासी भी पीछे नहीं हैं उन्होंने भी अब कसम खायी है की एक बार फिर इंदौर को नंबर वन बनाना है । इसी के साथ स्वछता सुर्वेक्षण 2018 के लिए सर्वे चालू हो गया है । यही वह पल है जब शहरवासियों की सहभागिता कर इंदौर को फिरसे नंबर 1 बनाना है क्योंकि इस बार के सर्वेक्षण 2018 में 4000 अंको में से 1400 अंक जन भागीदारी और 1000 अंक फीडबैक के भी है । इस तरह की पहल में स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में शीर्ष स्थान के लिए इंदौर ने देश के सभी शहरों में अपनी सफाई रैंकिंग में सुधार के लिए अच्छी तरह से काम किया था और इन्ही प्रयासों से स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में भी इंदौर को नंबर 1 बनाकर “इंदौर रहेगा नंबर 1” का सपना पूरा करे ।

नीचें दि गईं लिंक पर क्लिक कर फीडबैक देकर इंदौर को फिर नंबर 1 बनाइये       

https://www.swachhsurvekshan2018.org/CitizenFeedback

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